सबएक्यूट स्क्लेरोसिंग पैनएंसेफलाइटिस (Subacute Sclerosing Panencephalitis) - परिचय, कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार एवं रोकथाम के उपायपरिचय सबएक्यूट स्क्लेरोसिंग पैनएंसेफलाइटिस एक अत्यंत गंभीर और प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल विकार है जो मीज़ल्स (खसरा) संक्रमण के कुछ वर्षों बाद विकसित होता है। यह बीमारी धीरे-धीरे दिमाग के ऊतकों में सूजन, कोशिका क्षय एवं न्यूरोलॉजिकल कार्यों में गिरावट का कारण बनती है। रोग प्रायः बच्चों एवं युवा वयस्कों में देखने को मिलती है, और इसके प्रगति के साथ संज्ञानात्मक क्षमताओं में भी धीरे-धीरे गिरावट आती है।कारण ⚠ [b]मीज़ल्स वायरस का स्थायी संक्रमणजब मीज़ल्स संक्रमण के पश्चात प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को पूरी तरह से साफ नहीं कर पाती, तो वायरस दिमाग में छिप सकता है और वर्षों बाद सूजन एवं न्यूरोलॉजिकल क्षय का कारण बनता है। ⚠ [b]प्रतिरक्षा प्रणाली में असंतुलनकुछ मामलों में प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोर प्रतिक्रिया वायरस के स्थायी संक्रमण को बढ़ावा देती है, जिससे दिमाग में लंबे समय तक संक्रमण बना रहता है। ⚠ [b]आनुवांशिक एवं पर्यावरणीय कारकआनुवांशिक प्रवृत्ति एवं पर्यावरणीय प्रभाव भी रोग के विकास में सहायक हो सकते हैं।[b]लक्षण⚠ [b]संज्ञानात्मक गिरावटरोगी में धीरे-धीरे स्मरण शक्ति, सोचने-समझने एवं सीखने की क्षमता में गिरावट देखी जाती है। ⚠ [b]मायोक्लोनिक झटकेअचानक मांसपेशियों में झटके पड़ना, जिससे व्यक्ति को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। ⚠ [b]दौरे एवं मिर्गी संबंधी लक्षणकुछ रोगियों में दौरे पड़ने या मिर्गी के झटकों का अनुभव हो सकता है। ⚠ [b]व्यक्तित्व एवं व्यवहार में बदलावसमय के साथ मानसिक स्पष्टता में कमी, अवसाद एवं व्यवहार में असामान्यता देखने को मिलती है। ⚠ [b]न्यूरोलॉजिकल हानिरोग की प्रगति के साथ मांसपेशियों में कमजोरी, चलने-फिरने में असमर्थता एवं अन्य संवेदी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।[b]आयुर्वेदिक उपचारसबएक्यूट स्क्लेरोसिंग पैनएंसेफलाइटिस एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसके मुख्य उपचार आधुनिक चिकित्सा द्वारा किए जाते हैं। आयुर्वेदिक उपाय केवल पूरक के रूप में अपनाए जाते हैं ताकि दिमागी सूजन में कमी, प्रतिरक्षा प्रणाली में संतुलन एवं संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके ⚠ [b]अश्वगंधाअश्वगंधा शरीर की ऊर्जा बढ़ाने, मानसिक तनाव कम करने एवं तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में सहायक है। ⚠ [b]ब्राह्मीब्राह्मी मस्तिष्क की कार्यक्षमता में सुधार लाने तथा मानसिक स्पष्टता बढ़ाने में उपयोगी मानी जाती है। ⚠ [b]गुडूचीगुडूची प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित करने एवं कोशिकाओं में होने वाली सूजन को कम करने में मदद करती है। ⚠ [b]त्रिफलात्रिफला पाचन तंत्र को साफ रखने एवं शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन में सहायक होता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है। ⚠ [b]योग एवं ध्याननियमित योग, ध्यान एवं प्राणायाम से मानसिक तनाव में कमी आती है तथा शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है, जो न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।[b]रोकथाम के उपाय⚠ [b]टीकाकरणमीज़ल्स (खसरा) के खिलाफ टीकाकरण सबसे प्रभावी उपाय है, जिससे वायरस संक्रमण एवं इसके दीर्घकालिक जटिलताओं को रोका जा सकता है। ⚠ [b]नियमित चिकित्सकीय निगरानीमीज़ल्स संक्रमण के पश्चात नियमित जांच से किसी भी असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण का शीघ्र पता चल सकता है। ⚠ [b]स्वस्थ जीवनशैलीसंतुलित आहार, पर्याप्त नींद एवं नियमित व्यायाम से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत रहती है और दिमागी स्वास्थ्य में सुधार होता है। ⚠ [b]तनाव प्रबंधनयोग, ध्यान एवं विश्राम के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है, जो न्यूरोलॉजिकल विकारों के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।[b]निष्कर्षसबएक्यूट स्क्लेरोसिंग पैनएंसेफलाइटिस मीज़ल्स संक्रमण के बाद विकसित होने वाला एक गंभीर और प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें संज्ञानात्मक क्षति, मांसपेशियों में झटके एवं अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण प्रकट होते हैं। आधुनिक चिकित्सा द्वारा इसका उचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है; साथ ही पूरक आयुर्वेदिक उपाय, जैसे अश्वगंधा, ब्राह्मी, गुडूची, त्रिफला एवं नियमित योग एवं ध्यान, से दिमागी सूजन कम करने एवं संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। टीकाकरण, स्वस्थ जीवनशैली एवं नियमित चिकित्सकीय निगरानी से इस स्थिति के प्रभाव को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है; यदि लक्षण प्रकट हों तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है।
