पोलियो माइलाइटिस (Poliomyelitis) - कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज पोलियो माइलाइटिस (Poliomyelitis), जिसे संक्षेप में पोलियो कहा जाता है, एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है। यह पोलियोवायरस के कारण होता है और तंत्रिका तंत्र पर हमला कर सकता है, जिससे स्थायी विकलांगता या मृत्यु तक हो सकती है। यह रोग संक्रमित जल या भोजन के माध्यम से फैलता है। इस लेख में हम पोलियो माइलाइटिस के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। पोलियो माइलाइटिस के कारण (Causes of Poliomyelitis) ⚠ पोलियोवायरस संक्रमण (Poliovirus Infection) - पोलियोवायरस मुख्य रूप से दूषित पानी, भोजन या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैलता है। ⚠ खराब स्वच्छता (Poor Hygiene) - गंदे हाथों से भोजन करना या दूषित जल पीना संक्रमण का प्रमुख कारण है। ⚠ कमजोर प्रतिरोधक क्षमता (Weak Immune System) - जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, वे इस वायरस से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं। ⚠ टीकाकरण की कमी (Lack of Vaccination) - जो बच्चे पोलियो वैक्सीन से वंचित रह जाते हैं, उनमें इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। ⚠ मानव से मानव संक्रमण (Person-to-Person Transmission) - यह रोग संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने से या उसके खांसने और छींकने से फैल सकता है। पोलियो माइलाइटिस के लक्षण (Symptoms of Poliomyelitis) ⚠ हल्का बुखार और गले में खराश (Mild Fever & Sore Throat) - प्रारंभिक लक्षणों में हल्का बुखार, गले में खराश और सामान्य कमजोरी हो सकती है। ⚠ मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain) - पोलियो के कारण मांसपेशियों में दर्द और जकड़न महसूस हो सकती है। ⚠ सिरदर्द और थकान (Headache & Fatigue) - संक्रमित व्यक्ति को सिरदर्द और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। ⚠ हाथ-पैरों में कमजोरी (Weakness in Limbs) - पोलियो का असर आमतौर पर पैरों पर अधिक होता है, जिससे चलने-फिरने में दिक्कत होती है। ⚠ स्नायविक समस्याएं (Neurological Issues) - गंभीर मामलों में यह वायरस रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे लकवा हो सकता है। ⚠ शरीर के किसी हिस्से का स्थायी पक्षाघात (Permanent Paralysis) - उग्र संक्रमण के मामलों में व्यक्ति का कोई अंग स्थायी रूप से निष्क्रिय हो सकता है। पोलियो माइलाइटिस का आयुर्वेदिक इलाज (Ayurvedic Treatment for Poliomyelitis) ⚠ अश्वगंधा (Ashwagandha) - अश्वगंधा मांसपेशियों को मजबूत करने और स्नायविक स्वास्थ्य को सुधारने में सहायक है। ⚠ शतावरी (Shatavari) - यह तंत्रिका तंत्र को पोषण देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। ⚠ बाला (Bala) - बाला जड़ी-बूटी का उपयोग पोलियो के कारण आई कमजोरी को दूर करने के लिए किया जाता है। ⚠ गुग्गुल (Guggul) - यह सूजन को कम करने और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने में मदद करता है। ⚠ त्रिफला (Triphala) - त्रिफला शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में सहायक है। ⚠ तिल का तेल मालिश (Sesame Oil Massage) - तिल के तेल से प्रभावित अंगों की मालिश करने से मांसपेशियों में ताकत आती है और रक्त संचार बढ़ता है। ⚠ योग और प्राणायाम (Yoga & Pranayama) - हल्के योगासनों और प्राणायाम से तंत्रिका तंत्र को सक्रिय किया जा सकता है। पोलियो माइलाइटिस से बचाव के उपाय (Prevention Tips) ⚠ सभी बच्चों को समय पर पोलियो वैक्सीन जरूर दिलवाएं। ⚠ भोजन से पहले और बाद में हाथ धोने की आदत डालें। ⚠ स्वच्छ पानी का ही सेवन करें और दूषित भोजन से बचें। ⚠ संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। ⚠ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित आहार लें। ⚠ नियमित व्यायाम और योग करें ताकि स्नायविक तंत्र मजबूत बना रहे। निष्कर्ष (Conclusion) पोलियो माइलाइटिस एक गंभीर और स्थायी विकलांगता उत्पन्न करने वाली बीमारी है, लेकिन उचित टीकाकरण और स्वच्छता के नियमों का पालन करके इसे रोका जा सकता है। आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू उपायों से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि पोलियो के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
