सुप्तकोणासन (Supta Konasana) - Reclined Angle Pose
परिचय
सुप्तकोणासन, जिसे अंग्रेजी में Supta Konasana (Reclined Angle Pose) कहा जाता है, एक प्रभावी योग मुद्रा है जो शरीर में लचीलापन बढ़ाने और आंतरिक अंगों को सक्रिय करने में सहायक होती है। यह आसन विशेष रूप से रीढ़, पैरों और पेट की मांसपेशियों के लिए लाभदायक होता है। सुप्तकोणासन का नियमित अभ्यास शरीर को आराम देने के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
विधि
1️⃣ योगा मैट पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं।
2️⃣ दोनों पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और 90° का कोण बनाएं।
3️⃣ अब पैरों को फैलाते हुए एक वाइड एंगल पोजिशन में लाएं।
4️⃣ दोनों हाथों से पैरों को पकड़ने की कोशिश करें और सिर को ज़मीन से उठाएं।
5️⃣ इस स्थिति में 15-30 सेकंड तक रहें और गहरी सांसें लें।
6️⃣ धीरे-धीरे पैरों को वापस सीधा करें और प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
लाभ
✅ रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है।
✅ पेट की मांसपेशियों को टोन करता है और पाचन में सुधार करता है।
✅ पैरों, कूल्हों और जांघों में लचीलापन बढ़ाता है।
✅ तनाव, चिंता और मानसिक अशांति को कम करने में मदद करता है।
✅ रक्त संचार को बढ़ाता है और थकान को कम करता है।
✅ हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
सावधानियां और निषेध
🚫 पीठ दर्द या रीढ़ की हड्डी से संबंधित समस्याओं वाले लोग इस आसन को सावधानीपूर्वक करें।
🚫 गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
🚫 हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
🚫 यदि पैरों या कूल्हों में अधिक तनाव महसूस हो, तो पैरों को ज़मीन पर रखने का प्रयास करें।
निष्कर्ष
सुप्तकोणासन (Reclined Angle Pose) एक प्रभावशाली योग मुद्रा है, जो शरीर के लचीलेपन को बढ़ाने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होती है। नियमित अभ्यास से यह आसन शरीर को संतुलित रखता है और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। यदि इसे सही तरीके से किया जाए, तो यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी लाभदायक होता है।

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