रिएक्टिव आर्थराइटिस (Reactive Arthritis) – कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक समाधान
रिएक्टिव आर्थराइटिस एक प्रकार का सूजन संबंधी गठिया (Inflammatory Arthritis) है, जो शरीर में किसी संक्रमण के कारण विकसित होता है। यह संक्रमण आमतौर पर आंतों, मूत्र मार्ग या जननांग क्षेत्र में होता है। यह रोग जोड़ों में दर्द और सूजन के अलावा आंखों, त्वचा और मूत्र प्रणाली को भी प्रभावित कर सकता है।
आयुर्वेद में इस रोग को वात और पित्त दोष के असंतुलन से जुड़ा माना जाता है। उचित आहार, जड़ी-बूटियां और जीवनशैली में सुधार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इस लेख में हम रिएक्टिव आर्थराइटिस के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में विस्तार से जानेंगे।
रिएक्टिव आर्थराइटिस के कारण (Causes of Reactive Arthritis)
संक्रमण (Infection) – यह रोग आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है, विशेष रूप से क्लैमाइडिया, साल्मोनेला, यर्सिनिया, शिगेला और कैंपिलोबैक्टर बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के बाद।
प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया (Immune System Reaction) – संक्रमण के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक प्रतिक्रिया देती है, जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द उत्पन्न होता है।
आनुवंशिक कारण (Genetic Factors) – जिन लोगों में HLA-B27 जीन मौजूद होता है, उनमें इस रोग के विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
वात और पित्त दोष का असंतुलन – आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष के बढ़ने से जोड़ों में दर्द और जकड़न होती है, जबकि पित्त दोष बढ़ने से सूजन और जलन उत्पन्न होती है।
रिएक्टिव आर्थराइटिस के लक्षण (Symptoms of Reactive Arthritis)
⚠ जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न, विशेष रूप से घुटनों, टखनों और पैरों में।
⚠ आंखों में जलन, लाली और सूजन (कंजंक्टिवाइटिस या यूवाइटिस)।
⚠ पेशाब के दौरान जलन और मूत्र मार्ग में संक्रमण।
⚠ एड़ी, एड़ी की हड्डी और निचले पीठ में दर्द।
⚠ त्वचा पर चकत्ते या नाखूनों में असामान्य बदलाव।
⚠ सामान्य कमजोरी, थकान और हल्का बुखार।
रिएक्टिव आर्थराइटिस का आयुर्वेदिक समाधान (Ayurvedic Treatment for Reactive Arthritis)
गिलोय (Tinospora Cordifolia) – यह एक प्राकृतिक प्रतिरक्षा बूस्टर है, जो सूजन को कम करता है और वात-पित्त संतुलन में मदद करता है।
अश्वगंधा (Withania Somnifera) – यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होती है।
हल्दी (Turmeric) – हल्दी में करक्यूमिन होता है, जो सूजन को कम करने में प्रभावी है।
शल्लकी (Boswellia Serrata) – यह जोड़ों के दर्द और कठोरता को कम करने में मदद करती है।
त्रिफला (Triphala) – यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालकर वात और पित्त संतुलन बनाए रखता है।
मुलेठी (Licorice) – यह सूजन को कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक होती है।
रिएक्टिव आर्थराइटिस में आहार और जीवनशैली (Diet and Lifestyle for Reactive Arthritis)
⚠ हल्का और सुपाच्य भोजन लें, जिसमें हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और साबुत अनाज शामिल हों।
⚠ डेयरी उत्पादों, मांसाहार और मसालेदार भोजन से बचें, क्योंकि ये सूजन को बढ़ा सकते हैं।
⚠ हल्दी वाला दूध पिएं, जो हड्डियों और जोड़ों को मजबूत करता है।
⚠ शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और नारियल पानी पिएं।
⚠ रोजाना हल्के योगासन और ध्यान करें, जिससे जोड़ों की लचीलापन बढ़े और सूजन कम हो।
⚠ ठंडी और नमी वाली जगहों से बचें, क्योंकि ये वात दोष को बढ़ा सकते हैं।
रिएक्टिव आर्थराइटिस में योग और व्यायाम (Yoga and Exercise for Reactive Arthritis)
अनुलोम-विलोम (Alternate Nostril Breathing) – यह शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाकर सूजन को कम करता है।
भुजंगासन (Cobra Pose) – यह जोड़ों की लचीलापन बनाए रखने में सहायक होता है।
मकरासन (Crocodile Pose) – यह शरीर को आराम देता है और जोड़ों के दर्द को कम करता है।
बालासन (Childs Pose) – यह जोड़ों में लचीलापन बढ़ाने और तनाव कम करने में सहायक होता है।
हल्के व्यायाम और स्ट्रेचिंग – इससे जोड़ों की गतिशीलता बनी रहती है और दर्द कम होता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
रिएक्टिव आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून विकार है, जो संक्रमण के बाद विकसित होता है और जोड़ों, आंखों और मूत्र प्रणाली को प्रभावित करता है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां, संतुलित आहार, योग और प्राणायाम से इस रोग के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। समय पर पहचान और सही उपचार से इस रोग को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

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