पोस्टपार्टम हेमोरेज (Postpartum Hemorrhage) - कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार
पोस्टपार्टम हेमोरेज एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है जिसमें प्रसव के बाद गर्भावस्था से संबंधित महिलाओं में अत्यधिक रक्तस्राव होता है। यह स्थिति माँ तथा भ्रूण दोनों के लिए खतरनाक हो सकती है और तत्काल चिकित्सकीय देखभाल आवश्यक है। सहायक आयुर्वेदिक उपाय शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, सूजन कम करने तथा रिकवरी में सहयोग प्रदान करते हैं।
पोस्टपार्टम हेमोरेज के कारण (Causes of Postpartum Hemorrhage)
यूटेरस एटनी (Uterine Atony):
- प्रसव के बाद गर्भाशय की मांसपेशियाँ सिकुड़ने में असफल हो जाती हैं, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव होता है।
रिटेन्ड प्लेसेंटा (Retained Placenta):
- प्लेसेंटा के अंश रह जाने से गर्भाशय में सूजन और रक्तस्राव हो सकता है।
जननांग में चोट (Genital Tract Lacerations):
- प्रसव के दौरान जननांग के ऊतकों में चोट लगने से रक्तस्राव बढ़ जाता है।
कोएलागुलोपैथीज (Coagulopathies):
- रक्त के थक्के बनाने में गड़बड़ी से अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है।
यूटेरस इनवर्जन (Uterine Inversion):
- गर्भाशय का उल्टा हो जाना भी एक आपातकालीन स्थिति पैदा कर सकता है।
पोस्टपार्टम हेमोरेज के लक्षण (Symptoms of Postpartum Hemorrhage)
अत्यधिक रक्तस्राव (Excessive Bleeding):
- प्रसव के बाद अत्यधिक रक्त का बहना।
कम रक्तचाप (Low Blood Pressure):
- रक्तचाप में गिरावट, जिससे चक्कर आना एवं बेहोशी का खतरा।
तेज हृदय गति (Rapid Heart Rate):
- दिल की धड़कन में तेजी और शरीर में थकान।
त्वचा का फीका होना (Pale and Clammy Skin):
- त्वचा में पीला रंग तथा ठंडापन महसूस होना।
श्वास में कठिनाई (Difficulty in Breathing):
- सांस लेने में दिक्कत होना।
पोस्टपार्टम हेमोरेज का आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment for Postpartum Hemorrhage)
नोट: पोस्टपार्टम हेमोरेज एक गंभीर स्थिति है; आयुर्वेदिक उपचार केवल सहायक उपाय के रूप में अपनाये जाते हैं और तत्काल आधुनिक चिकित्सा उपचार आवश्यक है।
अश्वगंधा (Ashwagandha):
- माँ की ऊर्जा एवं प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है।
शतावरी (Shatavari):
- हार्मोन संतुलन बनाए रखने तथा प्रसव पश्चात रिकवरी में सहायक होती है।
हल्दी (Turmeric):
- हल्दी के एंटीइंफ्लेमेटरी गुण सूजन तथा जलन को नियंत्रित करते हैं।
त्रिफला (Triphala):
- पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने तथा विषाक्त पदार्थों के निवारण में सहायक होती है।
गिलोय (Giloy):
- गिलोय शरीर से विषाक्तता कम करने तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित रखने में मदद करती है।
पंचकर्म (Panchakarma):
- नियमित पंचकर्म से शरीर की सफाई तथा रिकवरी में सहयोग मिलता है।
पोस्टपार्टम हेमोरेज से बचाव के उपाय (Prevention Tips for Postpartum Hemorrhage)
⚠ प्रसव से पहले एवं बाद में उचित चिकित्सकीय देखभाल एवं निगरानी सुनिश्चित करें।
⚠ प्रसव के दौरान सुरक्षित प्रक्रियाओं एवं सर्जिकल तकनीकों का पालन करें।
⚠ संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त पानी एवं आराम से शरीर को मजबूत बनाएं।
⚠ तनाव प्रबंधन हेतु योग, ध्यान तथा प्राणायाम का नियमित अभ्यास करें।
⚠ रक्तस्राव की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
पोस्टपार्टम हेमोरेज एक गंभीर स्थिति है, जिसमें प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होता है। तत्काल चिकित्सकीय देखभाल अनिवार्य है। सहायक आयुर्वेदिक उपाय, संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर रिकवरी में सहयोग प्राप्त किया जा सकता है, परंतु प्राथमिक उपचार का विकल्प नहीं हो सकता। यदि लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।

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