अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara) - Eight Limbed Salutation
परिचय
अष्टांग नमस्कार को Eight Limbed Salutation के नाम से जाना जाता है। यह सूर्य नमस्कार का एक महत्वपूर्ण चरण है जिसमें शरीर के आठ हिस्से (दो हाथ, दो पैर, छाती, ठोड़ी और दोनों घुटने) ज़मीन को स्पर्श करते हैं। यह आसन शरीर की ताकत, लचीलापन और संतुलन को बढ़ाने में सहायक होता है। इसे योग में समर्पण और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
विधि
1️⃣ भुजंगासन या दंडासन की स्थिति से शुरुआत करें।
2️⃣ धीरे-धीरे अपने शरीर को ज़मीन की ओर झुकाएं और आठ हिस्सों को ज़मीन पर टिकाएं - दोनों पैर, दोनों घुटने, दोनों हथेलियां, छाती और ठोड़ी।
3️⃣ कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाएं और कोहनियों को शरीर के करीब रखें।
4️⃣ गर्दन को आगे की ओर रखते हुए ठोड़ी को ज़मीन से स्पर्श कराएं।
5️⃣ इस मुद्रा में कुछ सेकंड रुकें और गहरी सांस लें।
6️⃣ इसके बाद भुजंगासन या अगले योगासन में प्रवेश करें।
लाभ
✅ संपूर्ण शरीर को मजबूत और लचीला बनाता है।
✅ बाजुओं, कंधों और छाती की मांसपेशियों को ताकत प्रदान करता है।
✅ रीढ़ की हड्डी को लचीला और स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है।
✅ पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और चयापचय (Metabolism) में सुधार करता है।
✅ हृदय और फेफड़ों को मजबूती देता है और सांस लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है।
सावधानियां और निषेध
🚫 पीठ या गर्दन में चोट हो तो यह आसन करने से बचें।
🚫 उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित लोग इसे सावधानीपूर्वक करें।
🚫 गर्भवती महिलाओं को यह आसन नहीं करना चाहिए।
🚫 कंधों या कोहनियों में किसी प्रकार की समस्या हो तो इसे योग प्रशिक्षक की देखरेख में करें।
निष्कर्ष
अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara) शरीर की सहनशक्ति, संतुलन और लचीलेपन को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है। यह सूर्य नमस्कार का अभिन्न अंग है और इसे नियमित रूप से करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। सही तकनीक और सावधानियों के साथ अभ्यास करने पर इसके अधिकतम लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

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