फैब्री डिजीज (Fabry Disease) - परिचय, कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार एवं रोकथाम के उपायपरिचय फैब्री डिजीज एक आनुवांशिक लायसोमल स्टोरेज विकार है जिसमें अल्फा-गैलाक्टोसिडेज़ ए एंजाइम की कमी के कारण ग्लाइकोस्फिंगोलिपिड्स का शरीर के विभिन्न ऊतकों में संचय हो जाता है। यह रोग मुख्यतः पुरुषों में देखा जाता है और हृदय, गुर्दे, त्वचा एवं तंत्रिका तंत्र सहित कई अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।[b]कारण ⚠ [b]अल्फा-गैलाक्टोसिडेज़ ए की कमीमुख्य कारण एंजाइम की कमी से ग्लाइकोस्फिंगोलिपिड्स अपघटन में विफल रहते हैं, जिससे उनका संचय हो जाता है। ⚠ [b]अनुवांशिक उत्परिवर्तनयह रोग X-लिंक्ड आनुवांशिक विकार है, जिससे परिवार में इतिहास होने पर जोखिम बढ़ जाता है। ⚠ [b]आंतरिक चयापचय में बाधाघटित एंजाइम क्रिया से शरीर के ऊतकों में विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं, जो अंगों के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं।[b]लक्षण ⚠ [b]अंगों में दर्द एवं जलनविशेषकर हाथ-पैर में नाड़ियों के माध्यम से गुजरने वाले दर्द का अनुभव हो सकता है। ⚠ [b]त्वचा पर एनजियोकरेटोमात्वचा पर छोटे-छोटे लाल या बैंगनी धब्बे उत्पन्न हो जाते हैं। ⚠ [b]दृष्टि एवं सुनने में परिवर्तनदृष्टि में धुंधलापन या सुनने में असुविधा जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। ⚠ [b]हृदय एवं गुर्दे की समस्याएंसमय के साथ हृदय, गुर्दे एवं अन्य आंतरिक अंगों के कार्य में बाधा उत्पन्न होने का खतरा रहता है। ⚠ [b]तंत्रिका तंत्र में असुविधाचिड़चिड़ापन, थकान एवं मानसिक तनाव भी लक्षणों में शामिल हो सकते हैं।[b]आयुर्वेदिक उपचार ⚠ [b]अश्वगंधाशरीर की शक्ति बढ़ाने एवं सूजन नियंत्रित करने में सहायक होती है। ⚠ [b]ब्राह्मीमानसिक संतुलन एवं तंत्रिका तंत्र की कार्यक्षमता सुधारने में उपयोगी है। ⚠ [b]त्रिफलात्रिफला का सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है एवं विषाक्त पदार्थों के निष्कासन में मदद करता है। ⚠ [b]हल्दीहल्दी के प्राकृतिक सूजनरोधी गुण शरीर में सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। ⚠ [b]तुलसी का काढ़ातुलसी के काढ़े का सेवन प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाने में लाभकारी होता है। ⚠ [b]योग एवं प्राणायामनियमित योग, ध्यान एवं अनुलोम-विलोम प्राणायाम से मानसिक तनाव कम होता है एवं रक्त परिसंचरण में सुधार आता है।[b]रोकथाम के उपाय ⚠ [b]अनुवांशिक परामर्श एवं जागरूकतापरिवारिक इतिहास की जांच एवं अनुवांशिक परामर्श से जोखिम का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। ⚠ [b]नियमित चिकित्सकीय जांचसमय-समय पर विशेषज्ञ से जांच कराना रोग के प्रारंभिक लक्षणों का पता लगाने में सहायक है। ⚠ [b]स्वस्थ जीवनशैली अपनाएंसंतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं पर्याप्त विश्राम से संपूर्ण स्वास्थ्य मजबूत रहता है। ⚠ [b]संक्रमण एवं विषाक्त पदार्थों से बचावपर्यावरणीय प्रदूषण एवं हानिकारक रसायनों से दूरी बनाए रखें।[b]निष्कर्षफैब्री डिजीज एक गंभीर आनुवांशिक विकार है जिसमें अल्फा-गैलाक्टोसिडेज़ ए की कमी के कारण विभिन्न अंगों में ग्लाइकोस्फिंगोलिपिड्स का संचय होता है। उचित चिकित्सकीय देखरेख, नियमित जांच एवं स्वस्थ जीवनशैली के साथ आयुर्वेदिक उपचार का संयोजन रोग के प्रभाव को कम करने एवं जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हो सकता है; यदि लक्षण बढ़ें, तो शीघ्र विशेषज्ञ से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है।
