नेफ्रोनोफ्थीसिस (Nephronophthisis) - परिचय, कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार एवं रोकथाम के उपायपरिचय नेफ्रोनोफ्थीसिस एक आनुवांशिक गुर्दा विकार है जिसमें गुर्दे के ट्यूबुलोइंटरस्टिशियल ऊतकों में सूजन, इंटरस्टिशियल फाइब्रोसिस एवं मध्यम स्तर पर छोटे सिस्ट बन जाते हैं। यह स्थिति अक्सर बचपन या किशोरावस्था में प्रकट होती है और समय के साथ गुर्दे की कार्यक्षमता में कमी का कारण बनती है, जिससे अंततः एंड-स्टेज गुर्दा रोग (ESRD) विकसित हो सकता है।[b]कारण ⚠ [b]अनुवांशिक उत्परिवर्तनयह रोग ऑटोसोमल रिसेसिव तरीके से संचरित होता है, जिसमें NPHP1 समेत अन्य जीनों में उत्परिवर्तन के कारण गुर्दे के ऊतकों का अपघटन प्रभावित होता है। ⚠ [b]ट्यूबुलोइंटरस्टिशियल क्षतिअसामान्य कोशिकीय प्रतिक्रियाओं के कारण गुर्दे की संरचनात्मक क्षति एवं सूजन होती है। ⚠ [b]परिवारिक इतिहासयदि परिवार में इस विकार का इतिहास हो, तो नवजात में इसकी संभावना अधिक होती है।[b]लक्षण ⚠ [b]अत्यधिक मूत्र उत्सर्जनबच्चों में बार-बार पेशाब आना एवं मूत्र में मात्रा का असामान्य होना। ⚠ [b]पानी की कमी एवं निर्जलीकरणअधिक मूत्र उत्सर्जन से शरीर में जल की कमी एवं निर्जलीकरण की स्थिति बन सकती है। ⚠ [b]विकास में मंदताशारीरिक विकास में देरी, कम कद एवं वजन में कमी। ⚠ [b]गुर्दा कार्य में गिरावटसमय के साथ गुर्दे की कार्यक्षमता में गिरावट, अंततः एंड-स्टेज गुर्दा रोग का खतरा। ⚠ [b]अन्य लक्षणथकान, भूख में कमी एवं कभी-कभार ऊपरी पेशाब में खून के निशान भी देखे जा सकते हैं।[b]आयुर्वेदिक उपचार ⚠ [b]पुनर्नवापुनर्नवा का उपयोग गुर्दे की सूजन को कम करने एवं ऊतकों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक माना जाता है। ⚠ [b]गोक्शुरागोक्शुरा गुर्दे की कार्यक्षमता बढ़ाने एवं मूत्र प्रणाली को संतुलित रखने में उपयोगी है। ⚠ [b]शिलाजीतशिलाजीत का सेवन ऊर्जा बढ़ाने, थकान कम करने एवं संपूर्ण शरीर के रक्त परिसंचरण में सुधार लाने में मदद करता है। ⚠ [b]त्रिफलात्रिफला का नियमित सेवन पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है एवं शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन में सहायक होता है। ⚠ [b]योग एवं प्राणायामनियमित योग, ध्यान एवं अनुलोम-विलोम प्राणायाम से मानसिक तनाव में कमी तथा रक्त परिसंचरण में सुधार होता है, जो गुर्दे के ऊतकों को पर्याप्त पोषण प्रदान करता है।[b]रोकथाम के उपाय ⚠ [b]अनुवांशिक परामर्शपरिवार में इस विकार का इतिहास होने पर गर्भावस्था से पहले अनुवांशिक सलाह लेना महत्वपूर्ण है। ⚠ [b]नवजात स्क्रीनिंगनवजात शिशुओं में शीघ्र जांच से रोग के प्रारंभिक संकेतों का पता चल सकता है। ⚠ [b]स्वस्थ जीवनशैली अपनाएंसंतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं पर्याप्त विश्राम से संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार होता है। ⚠ [b]धूम्रपान एवं शराब से बचेंगुर्दे की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कारकों से बचाव करें। ⚠ [b]पर्यावरणीय प्रदूषण से बचावस्वच्छ वातावरण में रहने से विषाक्त पदार्थों के संपर्क से बचा जा सकता है।[b]निष्कर्षनेफ्रोनोफ्थीसिस एक गंभीर आनुवांशिक गुर्दा विकार है जिसमें गुर्दे के ट्यूबुलोइंटरस्टिशियल ऊतकों में सूजन एवं फाइब्रोसिस से गुर्दे की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। नियमित चिकित्सकीय देखरेख, नियंत्रित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली के साथ आयुर्वेदिक उपचार – जैसे पुनर्नवा, गोक्शुरा, शिलाजीत, त्रिफला एवं नियमित योग एवं प्राणायाम – का संयोजन रोग के प्रभाव को कम करने एवं रोगी के जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक हो सकता है; यदि लक्षण बढ़ें, तो शीघ्र विशेषज्ञ से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है।
