पोर्टल हायपरटेंशन (Portal Hypertension) - परिचय, कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार एवं रोकथाम के उपायपरिचय पोर्टल हायपरटेंशन वह स्थिति है जिसमें यकृत के पास स्थित पोर्टल वेन में रक्त का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे यकृत, तिल्ली एवं अन्य आंतरिक अंगों में रक्त का प्रवाह बाधित होता है और विभिन्न ऊतकों में सूजन एवं नुकसान हो सकता है। यह स्थिति आमतौर पर यकृत की बीमारियों जैसे सिरोसिस, हेपेटाइटिस या फोकल ट्यूमर के कारण उत्पन्न होती है।कारण ⚠ यकृत सिरोसिस या हेपेटाइटिस यकृत की कोशिकाओं में क्षति से रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा होती है ⚠ फोकल ट्यूमर या ऊतकीय संक्रमणयकृत या उसके आस-पास के ऊतकों में ट्यूमर या संक्रमण रक्त का प्रवाह बाधित करते हैं ⚠ [b]ब्लड क्लॉटिंग या थ्रोम्बोसिसरक्त के थक्के बनने से भी पोर्टल वेन में अवरोध हो सकता है ⚠ [b]हार्मोनल एवं न्यूरोकेमिकल असंतुलनकुछ मामलों में आंतरिक रासायनिक परिवर्तन भी रक्त प्रवाह पर प्रभाव डालते हैं[b]लक्षण ⚠ ऊपरी पेट में दर्द एवं भारीपनविशेषकर यकृत एवं तिल्ली के क्षेत्र में दर्द तथा भारीपन का अनुभव ⚠ [b]पेट में सूजनपेट का फुलना या सूजन होना ⚠ [b]त्वचा का पीला या ब्रोंज़ रंगजिगर की खराबी के कारण त्वचा एवं आंखों का रंग बदल सकता है ⚠ [b]थकान एवं कमजोरीलगातार थकान, ऊर्जा में कमी एवं असामान्य थकावट ⚠ [b]अन्य अंगों में कार्य में गिरावटहृदय, गुर्दे एवं अन्य अंगों के कार्य में बाधा हो सकती है[b]आयुर्वेदिक उपचार⚠ [b]अश्वगंधा शरीर की शक्ति बढ़ाने एवं मानसिक तनाव कम करने में सहायक ⚠ त्रिफला पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है एवं शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन में मदद करता है ⚠ हल्दी प्राकृतिक सूजनरोधी गुण रक्त परिसंचरण में सुधार एवं ऊतकों में सूजन को नियंत्रित करने में सहायक ⚠ तुलसी का काढ़ा प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाने में लाभकारी ⚠ योग एवं प्राणायाम नियमित योग, ध्यान एवं अनुलोम-विलोम प्राणायाम से मानसिक तनाव में कमी एवं रक्त परिसंचरण में सुधार होता है ⚠ पंचकर्म उपचार शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन एवं शुद्धिकरण में सहायक[b]रोकथाम के उपाय⚠ [b]नियमित चिकित्सकीय जांच कराएंविशेषज्ञ द्वारा यकृत एवं रक्त परिसंचरण की नियमित जांच से शुरुआती संकेतों का पता चलता है ⚠ [b]संतुलित आहार अपनाएंविटामिन, मिनरल एवं प्रोटीन युक्त आहार यकृत के स्वास्थ्य में सहायक होता है ⚠ [b]नियमित व्यायाम करेंहल्के व्यायाम एवं स्ट्रेचिंग से रक्त परिसंचरण एवं ऊतकों का पोषण बेहतर होता है ⚠ [b]धूम्रपान एवं शराब से बचेंहानिकारक आदतों से दूरी बनाए रखें, यकृत की रक्षा में सहायक ⚠ [b]तनाव प्रबंधन करेंयोग, ध्यान एवं पर्याप्त विश्राम से मानसिक तनाव को नियंत्रित रखें[b]निष्कर्षपोर्टल हायपरटेंशन यकृत के पास की रक्त वाहिकाओं में अत्यधिक दबाव के कारण उत्पन्न होने वाला विकार है, जो विभिन्न अंगों में सूजन एवं क्षति का कारण बनता है। नियमित चिकित्सकीय देखरेख, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं तनाव प्रबंधन के साथ आयुर्वेदिक उपचार – जैसे अश्वगंधा, त्रिफला, हल्दी, तुलसी का काढ़ा, योग एवं प्राणायाम तथा पंचकर्म – का संयोजन इस स्थिति के प्रभाव को कम करने एवं रोगी के जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है; यदि लक्षण बढ़ें, तो शीघ्र विशेषज्ञ से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है।
