एओर्टिक डिसेक्शन (Aortic Dissection) - परिचय, कारण, लक्षण, आयुर्वेदिक उपचार एवं रोकथाम के उपायपरिचय एओर्टिक डिसेक्शन (Aortic Dissection) एक जानलेवा कार्डियोवैस्कुलर आपातकालीन स्थिति है जिसमें महाधमनी की दीवार के भीतर अचानक फट जाती है। इससे दीवार की आंतरिक परत और बाहरी परत के बीच एक झूठा रास्ता बन जाता है, जिससे रक्त का असामान्य प्रवाह होता है। यह स्थिति तेज़ दर्द, श्वसन संबंधी समस्याओं एवं अन्य गंभीर लक्षण उत्पन्न कर सकती है। तत्काल चिकित्सकीय उपचार आवश्यक है, पर कुछ आयुर्वेदिक उपाय पूरक के रूप में अपनाए जा सकते हैं।कारण ⚠ उच्च रक्तचाप लगातार उच्च रक्तचाप महाधमनी की दीवार पर अत्यधिक दबाव डालता है, जिससे फटने का खतरा बढ़ जाता है। ⚠ एओर्टिक एन्यूरिज्म महाधमनी की दीवार में फैलाव (एन्यूरिज्म) होने से भी डिसेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। ⚠ आघात एवं गंभीर चोटसीधे शारीरिक आघात या दुर्घटना से एओर्टिक डिसेक्शन हो सकता है। ⚠ [b]अनुवांशिक विकारकुछ आनुवंशिक रोग जैसे मरफ़न सिंड्रोम एवं एलोपीथिक डिजीज में भी इस स्थिति का खतरा अधिक रहता है। ⚠ [b]दीर्घकालिक सूजनदीर्घकालिक सूजन एवं ऊतकों में कमजोरी भी महाधमनी की दीवार को अस्थिर कर सकती है।[b]लक्षण ⚠ तीव्र छाती एवं पीठ में दर्दअचानक शुरू होने वाला तेज़ और दरदनाक दर्द छाती से पीठ तक फैल सकता है। ⚠ [b]श्वसन में कठिनाईसूजन एवं रक्त के असामान्य प्रवाह के कारण सांस लेने में रुकावट आ सकती है। ⚠ [b]हृदयगति में अनियमिततादिल की धड़कन में तेज़ी या अनियमितता के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ⚠ [b]चक्कर एवं बेहोशीरक्त प्रवाह में व्यवधान से व्यक्ति को चक्कर आना या अस्थायी बेहोशी हो सकती है। ⚠ [b]अचानक कमजोरी एवं पसीनाशरीर में तीव्र कमजोरी, पसीना आना एवं अत्यधिक थकान भी देखने को मिल सकती है।[b]आयुर्वेदिक उपचारएओर्टिक डिसेक्शन (Aortic Dissection) एक गंभीर स्थिति है, अतः आयुर्वेदिक उपचार केवल पूरक के रूप में अपनाएं एवं तुरंत आधुनिक चिकित्सा की सहायता लें। कुछ आयुर्वेदिक उपाय निम्नलिखित हैं: ⚠ [b]अश्वगंधा अश्वगंधा तनाव कम करने एवं हृदय स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में सहायक है। ⚠ गुग्गुल गुग्गुल के गुण रक्त शोधन एवं सूजन कम करने में मददगार माने जाते हैं। ⚠ हल्दीहल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन तत्व सूजन रोधी एवं एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं। ⚠ [b]त्रिफला त्रिफला शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने एवं पाचन तंत्र को सुधारने में उपयोगी है। ⚠ नीमनीम के प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण रक्त को शुद्ध रखने एवं सूजन को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। ⚠ [b]योग एवं प्राणायामविशेषकर अनुलोम-विलोम एवं भ्रामरी प्राणायाम से मानसिक तनाव कम होता है एवं रक्त परिसंचरण में सुधार आता है। यह ध्यान में रखें कि एओर्टिक डिसेक्शन एक आपातकालीन स्थिति है, आयुर्वेदिक उपचार केवल पूरक के रूप में अपनाएं एवं तुरंत आधुनिक चिकित्सा से परामर्श करें।[b]रोकथाम के उपाय ⚠ [b]उच्च रक्तचाप का नियंत्रणनियमित चिकित्सकीय जांच एवं दवाओं के माध्यम से रक्तचाप नियंत्रित रखना अत्यंत आवश्यक है। ⚠ [b]स्वस्थ जीवनशैलीसंतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं तनाव प्रबंधन से हृदय एवं रक्त वाहिकाओं की सेहत बनी रहती है। ⚠ [b]नियमित चिकित्सकीय जांचएओर्टिक डिसेक्शन के जोखिम वाले व्यक्तियों को समय-समय पर विशेषज्ञ से जांच करवाना चाहिए। ⚠ [b]दुष्प्रभावों से बचावगंभीर आघात या उच्च जोखिम वाले कार्यों से बचाव एवं सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।[b]निष्कर्षएओर्टिक डिसेक्शन (Aortic Dissection) एक अत्यंत गंभीर स्थिति है जिसमें महाधमनी की दीवार में फटना हो जाता है। इसका तुरंत एवं प्रभावी उपचार जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण होता है। उच्च रक्तचाप, आनुवांशिक कारण एवं आघात इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम एवं तनाव प्रबंधन जैसे उपायों से रोकथाम संभव है। आयुर्वेदिक उपचार, जैसे अश्वगंधा, गुग्गुल, हल्दी, त्रिफला एवं नीम, केवल पूरक के रूप में सहायक हो सकते हैं। यदि कोई लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करें।
